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हिन्दु धर्म शास्त्रों के अनुसार त्रेतायुग में रावण के अत्याचारों को समाप्त करने तथा धर्म की पुनः स्थापना के लिये भगवान विष्णु ने मृत्यु लोक में श्री राम के रूप में अवतार लिया था। श्रीराम चन्द्र जी का जन्म चैत्र शुक्ल की नवमी [4] के दिन पुनर्वसु नक्षत्र तथा कर्क लग्न में रानी कौशल्या की कोख से, राजा दशरथ के घर में हुआ था।
श्रीरामनवमी का त्यौहार
पिछले कई हजार सालों से मनाया जा रहा है।
रामायण के अनुसार अयोध्या के राजा दशरथ की तीन पत्नियाँ थीं लेकिन बहुत समय तक कोई भी राजा दशरथ को सन्तान का सुख
नहीं दे पायी थीं जिससे राजा दशरथ बहुत परेशान रहते थे। पुत्र प्राप्ति के लिए
राजा दशरथ को ऋषि वशिष्ठ ने पुत्रकामेष्टि यज्ञ कराने को विचार दिया। इसके पश्चात् राजा दशरथ ने अपने जमाई, महर्षि ऋष्यश्रृंग से यज्ञ कराया। तत्पश्चात यज्ञकुण्ड से अग्निदेव अपने
हाथों में खीर की कटोरी लेकर बाहर निकले। [5]
यज्ञ समाप्ति के बाद महर्षि ऋष्यश्रृंग ने दशरथ की तीनों पत्नियों
को एक-एक कटोरी खीर खाने को दी। खीर खाने के कुछ महीनों बाद ही तीनों रानियाँ
गर्भवती हो गयीं। ठीक 9 महीनों बाद राजा दशरथ की सबसे बड़ी रानी कौशल्या ने श्रीराम को जो भगवान विष्णु के सातवें अवतार थे, कैकयी ने श्रीभरत को और सुमित्रा ने जुड़वा बच्चों श्रीलक्ष्मण और श्रीशत्रुघ्न को जन्म दिया।
भगवान श्रीराम का जन्म धरती पर दुष्ट प्राणियों को संघार करने के लिए हुआ था।
रामनवमी पर कब और कैसे करें रामलला की पूजा
उदया तिथि के हिसाब से इसे 17 अप्रैल बुधवार को ही मनाया जाएगा. इस दिन राम नवमी पूजन का शुभ समय (Ram Navami Puja Time) 09:18 से 11: 32 तक है, इसके अलावा अति शुभ समय सुबह 11:32 बजे से 12:29 मिनट तक है. इसमें आप श्रीराम जी की पूजा कर सकते हैं|
रामनवमी के दिन प्रभु श्री राम की पूजा का पुण्यफल पाने के लिए साधक को प्रात:काल सूर्योदय से पहले उठना चाहिए और स्नान-ध्यान करने के बाद सबसे पहले उगते हुए सूर्य देवता को अर्घ्य देकर उनका आशीर्वाद लेना चाहिए। चूंकि भगवान राम सूर्यवंशी थे, इसलिए रामनवमी के दिन पूजा के इस नियम का जरूर पालन करना चाहिए। इसके बाद साधक को भगवान राम के व्रत का विधि-विधान से संकल्प लेकर एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाना चाहिए। इसके बाद प्रभु श्री राम की मूर्ति या फोटो को उस पर स्थापित करके उन्हें गंगाजल अर्पित करना चाहिए।
भगवान राम की पूजा में वस्त्र, पुष्प और भोग हमेशा पीले रंग को प्रमुखता देना चाहिए। जैसे पूजा में उन्हें पीले रंग के फूल, पीले रंग का चंदन, पीले रंग के वस्त्र और पीले रंग की मिठाई का भोग अर्पित करें। भगवान राम की पूजा में कमल के पुष्प और तुलसी दल को चढ़ाने का बहुत ज्यादा महत्व है। इसलिए यदि आपके पास उपलब्ध हो तो जरूर चढ़ाएं| इसके बाद भगवान राम की धूप-दीप से पूजा करने के बाद भगवान रामरक्षास्तोत्र या रामचरित मानस का पाठ करें। यदि यह संभव न हो पाए तो कम से कम राम नाम के महामंत्र का अधिक से अधिक जाप जरूर करें। पूजा के अंत में भगवान राम की आरती करें और अधिक से अधिक लोगों को प्रसाद बांटें और स्वयं भी ग्रहण करें।
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